रिपोर्ट वैभव गुप्ता
समरेर/बदायूं। समरेर क्षेत्र में भैंस चराने गए बच्चों के बीच हुए विवाद के बाद अब समरेर चौकी पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। जानकारी के अनुसार, समरेर निवासी एक ही परिवार के अजीत यादव (16 वर्ष) पुत्र प्रकाश यादव और नन्हे यादव के पुत्र के बीच भैंस चराने के दौरान कहासुनी हो गई थी। इसके बाद नन्हे यादव ने समरेर चौकी में अजीत यादव पुत्र प्रकाश यादव, प्रकाश यादव पुत्र जय सिंह यादव तथा रोहित यादव पुत्र प्रकाश यादव के विरुद्ध तहरीर दी।बताया जा रहा है कि अगले ही दिन दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया और नन्हे यादव ने चौकी में लिखित रूप से समझौता पत्र भी दे दिया। इसके बावजूद अजीत यादव ने समरेर चौकी पर तैनात दरोगा पर मारपीट का आरोप लगाया है। अजीत का कहना है कि चौकी में उसके साथ 7–8 थप्पड़ और 4–5 डंडों से मारपीट की गई तथा समझौता होने के बाद भी उसे रात करीब 9 बजे तक चौकी में बैठाकर रखा गया, जिसके बाद छोड़ा गया।मामले को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। यदि नन्हे यादव के पुत्र को चोटें आई थीं और उसी आधार पर तहरीर दी गई थी, तो क्या उसका चिकित्सकीय परीक्षण (मेडिकल) कराया गया? यदि चोटें थीं, तो संबंधित कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई? वहीं, यदि अजीत यादव नाबालिग है, तो उसके साथ चौकी में मारपीट किए जाने के आरोप यदि सही पाए जाते हैं, तो यह भी गंभीर विषय होगा और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक होगी।इस संबंध में थाना अध्यक्ष वेदपाल सिंह से बातचीत की गई। उन्होंने कहा, “मुझे अभी इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। मुझे इस मामले का संज्ञान नहीं है। जैसे ही मामले का संज्ञान होगा, तभी मैं इस संबंध में कोई बाइट या जानकारी दे पाऊंगा।”अब देखना होगा कि एसएसपी अंकिता शर्मा एवं क्षेत्राधिकारी दातागंज आशेष नाथ सिंह इस मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराते हैं या नहीं। यदि जांच में पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो संबंधित के विरुद्ध विभागीय एवं विधिक कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं, तो पुलिस का पक्ष भी स्पष्ट हो जाएगा।