रिपोर्ट भूदेव सिंह प्रेमी
बदायूँ, । प्रदेश सरकार ने सड़क एवं पुल निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज करते हुए प्रदेशवासियों के आवागमन को पहले से अधिक सुगम बना दिया है। नदियों, पहाड़ों, घाटियों व अन्य अवरोधों पर सेतु निर्माण के जरिए सरकार ने न सिर्फ यात्रियों की सुविधा बढ़ाई है, बल्कि व्यापारिक गति को भी नई दिशा दी है। मानव सभ्यता के प्रारम्भ से ही आवागमन जीवन का प्रमुख हिस्सा रहा है। प्राचीन काल में लकड़ी, बांस आदि से पुल बनाए जाते थे, जो समय के साथ वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति के कारण आधुनिक लौह, सीमेंट व पत्थरों से निर्मित मजबूत संरचनाओं में बदल गए। इसी विकास यात्रा में उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निर्माण निगम ने अपनी गुणवत्ता और कार्यकुशलता से विशेष पहचान बनाई है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक 275 दीर्घ सेतु निर्मित कर आमजन को समर्पित किए जा चुके हैं, जिनमें से 89 सेतु ऐसी परियोजनाएँ थीं जो 1 अप्रैल 2017 से पहले वर्षों से अधूरी पड़ी थीं। इसी क्रम में 126 रेल उपरिगामी सेतु (ROB) और 16 फ्लाईओवर को भी पूर्ण कर उपयोग हेतु उपलब्ध कराया गया है, जिनमें 35 पुराने लंबित सेतु भी शामिल हैं। दीर्घ एवं उपरिगामी सेतुओं के साथ-साथ 1125 लघु सेतुओं का निर्माण भी पूरा कर लिया गया है। इनमें से 136 परियोजनाएँ 2017 से पूर्व लंबित थीं। इस प्रकार सरकार ने अपने कार्यकाल में कुल 1542 से अधिक पुलों का निर्माण कार्य पूर्ण कर प्रदेश के आवागमन नेटवर्क को मजबूत आधार प्रदान किया है। वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न महत्वपूर्ण मार्गों पर 116 दीर्घ सेतु, 595 लघु सेतु, 110 रेल उपरिगामी सेतु तथा 11 फ्लाईओवर सहित 832 सेतु निर्माण कार्य प्रगति पर हैं, जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त सेतु निगम द्वारा निक्षेप मद में 25 सेतु—जिनमें 11 दीर्घ सेतु, 8 रेल उपरिगामी सेतु और 6 फ्लाईओवर शामिल हैं—का निर्माण कार्य भी चल रहा है। प्रदेश सरकार का यह सेतु विकास अभियान न केवल आवागमन को सुगम बना रहा है, बल्कि प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी ऐतिहासिक भूमिका निभा रहा है।