रिपोर्ट हर्ष गौतम
अलीगढ़ ।धम्मभूमि बुद्धिस्ट वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस गरिमामयी आयोजन में बौद्ध विरासत को सशक्त बनाने, धम्म कारवां को आगे बढ़ाने तथा वृद्ध भिक्षु/भिक्षुणी सेवा विहार की आधारशिला स्थापना का यह कार्य वास्तव में करुणा, प्रज्ञा और समता के मार्ग पर चलने वाला एक जीवंत उदाहरण है।तथागत गौतम बुद्ध के धम्म का मूल उद्देश्य केवल आत्मकल्याण नहीं, बल्कि बहुजन हिताय – बहुजन सुखाय है। आज जब समाज में असमानता, अन्याय और भेदभाव अपने विभिन्न रूपों में मौजूद हैं, ऐसे समय में इस प्रकार के आयोजन यह स्पष्ट संदेश देते हैं कि धम्म ही वह मार्ग है जो मानवता को सच्ची स्वतंत्रता और सम्मान दिला सकता है।यह केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक-राजनीतिक चेतना का उदय है। यह उस विचारधारा का विस्तार है जो बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा स्थापित की गई—जहाँ समानता, न्याय और बंधुत्व केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन का आधार बनते हैं।अलीगढ़ की धरती से उठी यह धम्म की ज्योति अब केवल एक शहर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे राष्ट्र में परिवर्तन की लहर बनकर उभरेगी। यह कार्यक्रम आने वाले समय में एक मजबूत सामाजिक आंदोलन का आधार बनेगा, जो वंचित, शोषित और पीड़ित समाज को नई दिशा देगा।आज आवश्यकता है कि हम सभी धम्म के इस मार्ग को अपनाएं, संगठित हों और उस भारत के निर्माण में योगदान दें जहाँ हर व्यक्ति को समान अधिकार, सम्मान और अवसर प्राप्त हो।