स्टेट हेड ब्यूरो चीफ -भूदेव प्रेमी
बदायूँ : 1
बदायूं प्रदेश सरकार निर्माण श्रमिकों और कामगारों के जीवन में सुधार लाने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य है कि श्रमिकों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सहायता मिल सके। इसी के तहत उत्तर प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड का गठन किया गया है और श्रमिकों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं।कौन श्रमिक पंजीकरण करा सकते हैं?18 से 60 वर्ष तक के निर्माण श्रमिक, जिन्होंने साल में 90 दिन से ज्यादा निर्माण कार्य किया हो, वे पंजीकरण कराने के पात्र हैं।राज्य सरकार ने 40 से अधिक प्रकार के निर्माण कार्यों को इसमें शामिल किया है, जैसे–बढईगीरी, राजमिस्त्री, प्लम्बिंग, पुताई, टाइल्स लगाना, वेल्डिंग, सड़क निर्माण, ईंट ढोना, मशीनरी कार्य, सुरक्षा गार्ड, भवन सज्जा, खनन कार्य, ईंट-भट्ठा श्रमिक आदि।पंजीकरण की प्रक्रियाआवेदन पत्र के साथ ₹20 आवेदन शुल्क और ₹20 पहला अंशदान जमा करना होता है। एक बार में 3 साल का अंशदान भी दिया जा सकता है। जरूरी दस्तावेज: 2 पासपोर्ट फोटो, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, नियोजन प्रमाण पत्र।निर्माण स्थलों का पंजीकरण भी अनिवार्यजहां 10 या उससे अधिक श्रमिक काम करते हैं, ऐसे निर्माण स्थलों का पंजीकरण भी जरूरी है।10 लाख रुपये से अधिक लागत वाले भवनों पर यह नियम लागू होता है।इसके तहत निर्माण लागत का 1% उपकर (सेस) लिया जाता है जो श्रमिकों की योजनाओं पर खर्च किया जाता है।श्रमिकों को मिलती हैं ये प्रमुख योजनाएंसरकार पंजीकृत श्रमिकों और उनके परिवारों को कई लाभ दे रही है, जैसे–मातृत्व, शिशु एवं बालिका मददमृत्यु व दिव्यांगता सहायताकन्या विवाह सहायतागंभीर बीमारी सहायताकौशल विकास प्रशिक्षणमहात्मा गांधी पेंशनसन्त रविदास शिक्षा सहायताअटल आवासीय विद्यालयआपदा राहत सहायताप्रदेश सरकार के मुताबिक, इन योजनाओं से लाखों श्रमिकों को करोड़ों रुपये की आर्थिक मदद दी जा चुकी है। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी निर्माण श्रमिक बिना सहायता के न रहे और सभी को योजनाओं का सीधा लाभ मिलेंगे ।