नगर निगम की कार्रवाई बस एक दिखावा
रिपोर्ट गोपीनाथ रावत
अयोध्या। अयोध्या के फुटपाथों का असली सौंदर्य तब ही दिखता है जब मुख्यमंत्री जी का दौरा तय हो। जैसे ही खबर आती है कि मुख्यमंत्री जी आ रहे हैं, नगर निगम के अफसरों में हलचल मच जाती है मानो किसी सोते हुए शेर को मच्छर ने काट लिया हो। कागजों में कार्रवाई करने वाले अफसर कुछ घंटों में फुटपाथ खाली करवा लेते हैं, गुमटियां और ठेले गायब हो जाते हैं, और सड़कें चकाचक चमकने लगती हैं। देखकर ऐसा लगता है जैसे कभी वहां अतिक्रमण था ही नहीं! अब यह सफाई देखकर तो प्रभु श्रीराम भी सोचेंगे, “काश! हर दिन ऐसा होता!”लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री जी का काफिला वापसी करता है, नगर निगम फिर अपनी “परफेक्ट नींद” में लौट आता है। अतिक्रमण करने वाले दुकानदार भी अपनी दुकानें और ठेले फिर से खोल लेते हैं, और फुटपाथ फिर से उनके गोदाम बन जाते हैं। नगर निगम भी फिर वही चुप्पी साध लेता है, जैसे उसके पास काम न हो, बस अगले बड़े नेता के दौरे का इंतजार कर रहा हो!अयोध्या की सड़कों पर देखिए — दोनों तरफ के फुटपाथों पर ऐसा लगता है जैसे दुकानदारों ने अपना छोटा-मोटा साम्राज्य बसा लिया हो। दाईं ओर पकोड़े वाले खड़े हैं, बाईं ओर कपड़ों के ठेले, और बीच सड़क पर मोबाइल कवर बिकते हैं। अगर किसी ने गलती से फुटपाथ पर कदम रख लिया, तो दुकानदार ऐसे घूरते हैं जैसे किसी ने उनके पैतृक साम्राज्य में घुसपैठ कर दी हो!नगर निगम का सिद्धांत भी साफ है — “फुटपाथ दुकानदारों के लिए, सड़क जनता के लिए, और जिम्मेदारी किसी की नहीं!”अतिक्रमण की यह पूरी कहानी नगर निगम की “अनदेखी” और “अवसरवादी चुप्पी” का हिस्सा है। सड़क और फुटपाथ का जो अतिक्रमण दिखता है, वो दरअसल नगर निगम का भी अतिक्रमण है, क्योंकि यह उसकी जिम्मेदारी है कि वह इन सड़कों और जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त रखे, ताकि भविष्य में जब सड़क चौड़ी करनी हो, नाली बनानी हो, या पार्किंग की व्यवस्था करनी हो, तब उसे कोई परेशानी न हो। लेकिन अगर हर जगह दुकानें और ठेले लग जाएं, तो कल विकास के लिए जगह कहां मिलेगी?इसीलिए नगर निगम का विकास मॉडल कुछ ऐसा है — “अतिक्रमण बढ़ाओ, फोटो खिंचवाओ, और जब कोई वीआईपी आए, तो मच्छर के काटे शेर की तरह जागकर कुछ घंटों के लिए सफाई करवा दो!”लेकिन सवाल यही उठता है — क्या नगर निगम कभी अपनी जिम्मेदारी निभाएगा या सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए सफाई करेगा? क्या अयोध्या की सड़कों और फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त रखने का असली काम कभी होगा, या हम इसी नाटक के साक्षी बने रहेंगे?किसी दिन, नगर निगम को समझना होगा कि “रंगीन सफाई और दिखावे से सड़कें नहीं बनतीं!” तब तक हम जनता यही कहेंगे — “अयोध्या के फुटपाथ का सौंदर्य केवल मुख्यमंत्री जी के दौरे के समय ही दिखता है!”