अयोध्या। जिले की 772 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल अब महज नौ दिन शेष रह गया है। 26 मई को ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पंचायतों के संचालन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर मंथन तेज हो गया है। प्रस्तावित विधानसभा चुनावों और ग्राम प्रधानों की नाराजगी से बचने के लिए सरकार ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाए जाने के विकल्प पर विचार कर रही है।पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर लगातार ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने की वकालत कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों द्वारा भी मंत्री के बयान को दोहराया जा रहा है। इससे पहले ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने पर पंचायतों के संचालन की जिम्मेदारी एडीओ पंचायत और पंचायत सचिवों को सौंपी गई थी, लेकिन इस बार प्रधान संगठन भी चुनाव न होने की स्थिति में ग्राम प्रधानों को ही जिम्मेदारी दिए जाने की मांग कर रहे हैं।जानकारी के अनुसार, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग को समय पर कराना था, लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से पंचायत चुनाव में अपेक्षित रुचि न दिखाए जाने के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई। पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन में देरी होने से आरक्षण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसके चलते मतपत्र, नामांकन पत्र समेत अन्य चुनावी सामग्री डबल लॉक में सुरक्षित रखी गई है और चुनाव समय पर नहीं हो सके।वहीं मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया भी पांच बार टाली जा चुकी है। अब 10 जून को अंतिम प्रकाशन प्रस्तावित है। ऐसे में पंचायतों के संचालन को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था क्या होगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
26 मई को खत्म होगा ग्राम पंचायतों का कार्यकाल, प्रधानों को ही प्रशासक बनाने पर मंथन
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