हरिद्वार आज हजरत मोहम्मद अल्लहे है कटहा पीर का जो है मेहंदी डोरी रस्म सालाना मेहंदी रस्म अदा की गई है 857से सालाना उर्फ परंपरा हमारे बुजुर्ग पहले से ही मनाते आ रहे हैं मेहंदी डोरी के रूप में मनाया जाता है और मेहंदी डोरी की रस्म होने के बाद ही मेले की शुरुआत हो जाती है और जो परंपरा चलती आई है आज भी इस चीज को दर्शाती है कि यह 857 साल से चलती आई और आगे भी ऐसे ही चलती रहेगी और वरिस अहमद जी न कहा मैं सभी क्षेत्र वे देश प्रदेश की जनता को सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं वह मुबारकबाद देना चाहूंगा। यह परंपरा एक ऐसी परंपरा है जिससे एक मैसेज एक पूरे भारत देश में बहार दुनिया के अंदर जाता है। और यह मेहंदी डोरी जो रसम है यह साबिर पाक की मेहंदी डोरी की मेले से पहले एक आगाज होता है और इसी में सभी को कहना चाहूंगा क सभी जाहिरत वे आसपास के लोग ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचे मोनी सैनी की खास रिपोर्ट

