रिपोर्ट अशोक कुमार
शाहजहाँपुर । एक अध्ययन में आया है कि कोल्ड ड्रिंक… चीनी के घोल वाले कार्बोनेटेड वाटर से शरीर में तेजी से पानी की कमी होती है गर्मी की चपेट में आने पर यह ज्यादा घातक हो सकता है इसके लिए जलवायु परिवर्तन, मानव स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीसीएचएच) ने मप्र समेत पूरे देश में अलर्ट जारी किया है एनपीसीसीएचएच की भोपाल में हुई कार्यशाला में इसके प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी जिला स्वास्थ्य विभाग को दी है जर्नल सर्कुलेशन में प्रकाशित शोध के अनुसार सप्ताह में दो लीटर से अधिक सॉफ्ट ड्रिंक पीना घातक है इसमें 37 से 73 साल के दो लाख लोगों पर हुए शोध पर पाया कि कृत्रिम रूप से तैयार ड्रिंक पीने वालों में 20 फीसदी अधिक रोगों का खतरा होता है वे डिमेंशिया, मोटापा, टाइप टू डायबिटीज और हृदय रोग के मरीज बन सकते हैं इन ड्रिंक्स में शक्कर अधिक होती है इससे ब्लड शुगर बढ़ता है लंबे समय तक इसे पीने से टाइप-2 डायबिटीज का खतरा हो जाता है कई ड्रिंक्स में कार्बन डाईऑक्साइड होते हैं इससे गैस की समस्या बढ़ती है पाचन तंत्र भी प्रभावित होता है इनमें फॉस्फोरिक और कार्बोनिक एसिड होती है यह दांतों पर भी बुरा असर डालता है इससे दांतों की सुरक्षा परत (इनेमल) को नुकसान होता हैइन ड्रिंक्स को शरीर से बाहर निकालने में किडनी को दो से तीन गुना अधिक काम करता पड़ता है लंबे समय तक इस प्रक्रिया से किडनी के खराब होने का खतरा बढ़ता है इसमें मौजूद कैफीन दिमाग को प्रभावित करता है ।