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ईद का दिन है गले तो मिल ले , रस्म ए दुनिया भी है मौका भी , दस्तूर भी है

रिपोर्ट अनिल अनुराग

शाहजहाँपुर । ईद शुक्राने , मोहब्बत , खुशियों का दिन है जब अमीर गरीब एक साथ इबादत करते हैं रोजा , नवाज ,इफ्तार , सिबईयाँ, ईदी , फ़ितरा , जकात ही ईद है इसी पाक रमजान महीने में “कुरआन” पैगम्बर साहब को नाजिल हुई थी । जिले की सभी ईदगाहों में सोमवार को ईद की नमाज ख़ुशनुमा माहौल में अदा की गई । निगोही , खुदागंज , कटरा , तिलहर , कलान , जलालाबाद , कांट , मिर्जापुर , पुवायाँ , खुटार आदि कस्बों में सुबह सवेरे से ही निर्धारित समय आठ बजे हजारों लोग नये नये कपड़े पहन ईदगाहों में पहुँच गए । महानगर में इमाम हुजूर अहमद मंजरी की अगुवाई में नमाज अदा कर कौम की तरक्की की दुआ की गई । पहले से ही सुरक्षा के सभी आवश्यक इंतजाम पुलिस प्रशासन ने कर रखे थे । पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी, एसपी सिटी भवरे दीक्षा अरूण और देवेन्द्र कुमार क्षेत्र में लगातार गश्त करते दिखे । ईदगाहों की सभी सड़कों पर भी पुलिस बल मुस्तैदी से तैनात रहे । शासन के निर्देशानुसार ईद और नवरात्र के त्योहारों को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन पहले से लगातार सक्रिय रहा । जिलाधिकारी ,पुलिस अधीक्षक , एसडीएम ने पूरे जिले में शांति समितियों की बैठक आहूत कर आवश्यक दिशा निर्देश देकर शांति , सौहार्द्र , सामाजिक एकता की अपीलें कर रखी थीं । सभी ईदगाहों में साफ सफाई और सुरक्षा आदि के विशेष प्रबंध पहले से प्रशासन ने कर रखे थे । नमाज के बाद सभी ईमामों / नमाजियों ने देश / समाज की तरक्की और शांति के लिए दुआ मांगकर एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी । माहे रमजान में महीने भर के रोजों के बाद ईद की खुशियाँ सबके चेहरों पर नुमाया हो रही थीं । रोजा , नमाज , जकात के पावन त्योहार पर मुस्लिम वर्ग के साथ हिन्दु भाई भी उनकी खुशियों में शरीक होकर सामाजिक एकता को मजबूत कर रहे थे ।
निगोही कस्बे की चारों मस्जिदों में भी सुबह आठ बजते ही नमाजियों का हुजुम उमड़ पड़ा । ईदगाहों की ओर जाते बाल , वृद्ध , युवक एक अलग ही समां बाँध रहे थे । सभी मस्जिदों के इमामों , नमाजियों ने ईद की नमाज के बाद कौम की तरक्की की दुआ की । ईदगाह में क्षेत्रीय राजनेता पूर्व विधायक रोशन लाल वर्मा , एडवोकेट सत्यपाल आदि ने नमाजियों को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद पेश कीं ।
दिल खोलकर सबको अपनाना , मिलना जुलना ही ईद है बरना लोग कहेगें ही कि जनाब ईद के चाँद हो गए हो । लोग बाग कहते भी हैं कि अच्छे नम्बरों से पास होना भी ईद है बिछड़ा यार मिल जाए , तो ईद हो जाए । खुश रहें ,खुशियाँ बांटे , शिकवा / शिकायतों , भेदभाव से बचना ही ईद है ईद उल फितर पर फ़ितरा देना बाजिव है जकात सम्पन्न लोगों के लिए फर्ज है उन्हें अपनी कमाई का निश्चित भाग गरीबों / फकीरों को तकसीम करना पड़ता है

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