रिपोर्ट अशोक कुमार
शाहजहाँपुर । लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है पत्रकारिता ! जब शासन प्रशासन ही पत्रकारों पर मुकदमे दर्ज कर अत्याचार करने लगे, तो ऐसा लगता है कि सत्य , भ्रष्टाचार , कदाचार पर बोलना ही गैरकानूनी हो गया है ! अभी कुछ दिनों पहले ही एक पत्रकार पर प्रशासन द्वारा मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की तैयारी कर ली थी , क्योंकि उसने भ्रष्टाचार और पीड़ितों की आवाज़ बुलन्द की थी । मीडिया का कार्य , उद्देश्य ही आम जनसामानस की आह ,कराह में अपनी आवाज जोड़ना है मुखर करना है फिर इस पर बंदिशें , कानूनी कार्यवाही क्यों ! क्या प्रदेश के मुख्यमंत्री की हाल की घोषणा को पुलिस ,प्रशासन दबाने की कोशिश कर रहा है ! पत्रकारों के हितों की सुरक्षा , स्वतंत्र / निष्पक्ष पत्रकारिता को समर्थन , पत्रकारों के अधिकारों में दखल देने पर सख्त कार्यवाही ,अधिकारी / कर्मचारी के बाधा डालने पर मुख्यमंत्री से शिकायत , लेखनी पर रोक न लगाने , साथ देने का भरोसा क्या हवा हवाई है ! वास्तव में प्रशासन नेताओं के संरक्षण में तानाशाह बन गया है पत्रकार जन जन की आवाज है उन्हें जो दिखेगा ,वही लिखेगा । अत्याचार , अन्याय के खिलाफ खड़े रहकर सरकार तक जन जन की पुकार पहुँचाना ही उनका कर्तव्य है लेकिन उन पर झूठे आरोप / मुकदमे लगाकर प्रताड़ित किया जायेगा , तो स्पष्ट है उनकी आवाज को नक्कारखाने में तूती की आवाज बना देने का इरादा है पत्रकारों ने जब जब भ्रष्टाचार, घोटाले और अन्याय को अपने शब्द दिए , उन्हें गैर कानूनी साबित कर मुकदमों में घसीटा गया है यह पूरी मीडिया के लिए अतीव चिंता की बात है अभिव्यक्ति की लोकतांत्रिक स्वतंत्रता यही है… शासन ,प्रशासन की कार्यप्रणाली के विरुद्ध लिखना अपराध बन गया है.. तो मीडिया के लिए दूसरा आपातकाल दूर नहीं …सत्य , प्रताड़ितों की पुकार पर ताला लगा दिया जायेगा । आम जनमानस को भी समझ जाना चाहिए कि कि जब पत्रकार निशाना बनेगें , तो उनकी आवाज भी खामोश करने का इरादा है वैसे आज की पत्रकारिता में भी किसी हद तक उद्योगपतियों , राजनेताओं का संरक्षण हो रहा है लेकिन अधिकांश पत्रकारिता आज भी निष्पक्ष , निरपेक्ष , सत्यानुगामी है जो अपने कर्तव्यपथ से डिगने वाली नही है ।