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103 साल के निरपराध सिख बुजुर्ग को 16 माह बाद जमानत मिली

रिपोर्ट अनिल अनुराग

शाहजहाँपुर । घोर कलयुग है भाई : कोई किसी का नही ! सब मोह , माया ,धन के बबंडर में फंसे हैं संभवतः एक भी नही , जो लोभ , लालच , सांसारिक बुराइयों से बचा हो …यही आज दिखा ..जिला कारागार में निरपराध बंद बंडा क्षेत्र के बसंतापुर गांव निवासी 103 साल के बुजुर्ग को 16 महीने बाद आखिरकार जमानत मिल ही गई । जमानत मिलने के बाद बुजुर्ग बुधवार को जेल से बाहर आ पाए । बुजुर्ग का अपराध क्या था …यही न कि उन्होंनें अपनी कीमती जमीन गुरुद्वारे को दान कर दी …भई , इस उम्र में इससे बड़ा पुण्य , सेवा और क्या हो सकती है… इस धनरूपी मोह माया का त्याग ही तो वास्तविक जीवन है यह धन धर्म कर्म के काम आ जाए , इससे तो बड़ा कुछ नही !!..वहीं बुजुर्ग ने कहना था ” कोई भी बेटे अपने मां बाप के साथ ऐसा व्यवहार न करें ,मेरे बेटों ने मेरे साथ गलत किया ,भगवान कमलजीत , हरप्रीत जैसे बेटे किसी को न दें” । ज्ञातव्य है 2018 से बुजुर्ग की 5 एकड़ जमीन पर मुकदमा चल रहा है उन्होंने वह जमीन गुरुद्वारे के नाम कर दी थी । इसी बात से बेटे नाराज हो गए थे । जमीन के मुकदमे को लेकर बेटे पिता को लगातार गुमराह करते रहे । बुजुर्ग पिता को उन्होनें झूठ कहकर बरगलाया कि मामला खत्म हो गया और स्वयं पेशी पर जाते रहे । लगातार गैरहाजिरी के कारण कोर्ट से पिता के नाम वारंट कट गया और उन्हें जेल जाना पड़ा । मिजाजी लाल जैसे कारागार अधीक्षक जो नवाचारों , सुधारों के लिए प्रख्यात हैं से जानकारी लगने पर सहयोग संस्था के अधिकारी 4 महीने से बुजुर्ग की जमानत की पैरवी करते रहे । लेकिन बेटे जमानत में लगातार अड़चन लगाते रहे । सहयोग संस्था के सतत प्रयास से बुधवार को उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई । घोषणा के अनुसार अब बुजुर्ग के रहने और खाने पीने की व्यवस्था भी सहयोग संस्था की ओर से किया जाएगा । यह कार्य कलयुग में सतयुग का प्रमाण है कि अच्छाइयों के नाम पर कुछ न कुछ आज भी शेष है गुरूद्वारे को जमीन के स्वैच्छिक दान को लेकर नाराज होकर दोनों बेटों ने पिता के खिलाफ षडयंत्र रचा । झूठा मुकदमा लगवाकर जेल भिजवा दिया । दोनों बेटे उनसे मिलने के लिए कभी जेल भी नहीं आए । करीब 4 महीने पहले सहयोग संस्था के संरक्षक समाजसेवी शाहनवाज खां जेल में कंबल वितरण कर रहे थे कि तब उनकी नजर बुजुर्ग कैदी पर पड़ी । उन्हें बुजुर्ग की कहानी के बारे में पता चला । तब शाहनवाज ने बुजुर्ग की जमानत कराने से लेकर जीवनयापन तक की जिम्मेदारी उठाई । बुजुर्ग गुरमीत सिंह ने बताया- मुझे कुछ नहीं पता था । एक दिन वारंट आया और पुलिस ने मुझे जेल भेज दिया । बेटे कुछ गलत करते थे, हम उनको रोकते थे । इसलिए षडयंत्र करके हमें जेल भिजवा दिया। उन्होंने सहयोग संस्था का आभार जताया । जेल अधीक्षक मिजाजी लाल ने कहा- कैदी अगर बुजुर्ग है तो जेल में उसका खास ध्यान रखा जाता है सहयोग संस्था ने जमानत में अहम भूमिका निभाई है सोलह महीने के बाद उनको जमानत मिली है उनके बेटे नशा करते हैं और गलत लोगों के साथ उनका उठना बैठना था । बुजुर्ग के वकील जीतेंद्र सिंह ने बताया- उन्होंने जब जमानत के लिए अर्जी लगाई ,तो बुजुर्ग के बेटों ने कई अड़चनें लगाईं । पहली तारीख पर जमानत हो गई थी, लेकिन बेटों के अड़चन के कारण 4 महीने से ज्यादा समय जेल में रहना पड़ा ।

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