रिपोर्ट अशोक कुमार
शाहजहाँपुर । प्रसिद्ध लेखक , दून इन्टरनेशनल स्कूल शाहजहाँपुर के निदेशक डा० जसमीत साहनी के अनुसार प्राइवेट स्कूलों में किताबों के करप्शन के पीछे का कारण मात्र कमीशनखोरी ही नहीं है इसके पीछे एक बहुत बड़ा षडयंत्र भी है असल में आरटीई नियमों के अनुसार हर प्राइवेट स्कूल को एक चौथाई सीटें गरीब परिवारों के योग्य छात्रों के लिए रखनी होती हैं पर निजी स्कूल जानबूझ कर किताबों के सैट इतना महंगा कर देते हैं ताकि ये होनहार छात्र निःशुल्क प्रवेश मिलने के बावजूद भी महगी किताबें ना ख़रीद पाऍं व स्कूल छोड़ने को मजबूर हो जाएँ । यही खाली सीटें बाद में मोटी फीस लेकर बेच दी जाती हैं क्या ये नाइंसाफी नहीं है ? उन्होनें कहा कि मैं शीघ्र ही इसकी जाँच करवाऊँगा कि सभी प्राइवेट स्कूलों में आरटीई के 25% बच्चे पढ़ भी रहे हैं या सिर्फ़ कागजों में खेला चल रहा है ।