मिल्कीपुर/अयोध्या रिपोट गोपीनाथ रावत – जनपद की मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र में 26 वर्षों के बाद एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच सीधी टक्कर होने जा रही है। आगामी 5 फरवरी को होने वाला यह उपचुनाव इस सीट का 20 साल बाद तीसरा उपचुनाव है, जो विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सीट का राजनीतिक इतिहास रोचक रहा है। 1996 में सपा के मित्रसेन यादव के विधायक बनने के बाद, 1998 में उनके सांसद बनने पर पहला उपचुनाव हुआ। इस चुनाव में सपा के रामचंद्र यादव ने भाजपा के बृजभूषण त्रिपाठी को 3,132 मतों से पराजित किया। 2004 में हुए दूसरे उपचुनाव में भी सपा ने बाजी मारी, जहां रामचंद्र यादव ने बसपा के आनंदसेन यादव को 35,018 मतों के बड़े अंतर से हराया। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हो गई थी। वर्तमान उपचुनाव में स्थिति दिलचस्प है क्योंकि कांग्रेस और बसपा के चुनाव मैदान से दूर रहने के कारण मुकाबला सीधे भाजपा और सपा के बीच है। सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल सपा के बीच यह मुकाबला न केवल इस सीट के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्र के भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।