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अधिकारी नियमित रूप से संचालित गौ आश्रय स्थलों का करें निरीक्षण, गौशालाओं में गौवंशों के लिए बेहतर सुविधाएं रहें उपलब्ध – सदस्य गौ सेवा आयोग

गौ-आश्रय स्थलों में पर्याप्त मात्रा में भूसा दाना-चारा उपलब्ध रहे, संरक्षित पशुओं की उचित देखभाल हो, सर्दी से बचाव हेतु किये जायें पर्याप्त इंतजाम – उपाध्याय

गाय राजनीति का मुद्दा नहीं, श्रद्धा का केंद्र है, गौ-माता का घर किसान का खूंटा है, गौशाला नहीं – सदस्य गौ सेवा आयोग

मैनपुरी – सदस्य गौ सेवा आयोग उ.प्र. रमाकांत उपाध्याय ने गौ संरक्षण एवं अनुश्रवण समिति के अधिकारियों के साथ गौवंश संरक्षण एवं संवर्धन के संबंध में आयोजित समीक्षा बैठक में खंड विकास अधिकारियों, अधिशासी अधिकारी नगर निकाय, पशु चिकित्साधिकारियों से कहा कि जनपद में संचालित 50 गौ-आश्रय स्थलों में संरक्षित 7486 गौवशों की बेहतर देखभाल की जाए, प्रत्येक गौशाला में सुबह-शाम भूसे चारे, सानी का समय निर्धारित कर भूसा चारा खिलाया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्रत्येक गोवंश हेतु ₹50 प्रतिदिन के हिसाब से मुहैया करा रही है. सुनिश्चित किया जाए कि गौवंशों के भरण-पोषण हेतु मिलने वाली पूरीधनराशि संरक्षित गौवंशों पर ही खर्च हो। उन्होंने खंड विकास अधिकारियों, पशु चिकित्साधिकारियों से कहा कि प्रत्येक विकास खंड में कम से कम 01-01 मॉडल गौशाला विकसित की जाए, स्वयं सेवी संस्थाओं को संचालित गौशालाओं को गोद लेने के लिए प्रेरित किया जाए, गौशाला में संरक्षित गौवंशों को मुख्यमंत्री गोधन सहभागिता योजना में पशुपालकों को उपलब्ध कराया जाए और उन्हें ₹50 प्रति गोवंश के हिसाब से समय से उपलब्ध कराया जाए, जो गौपालक 04 से अधिक गोवंश लेना चाहें उन्हें योजना के तहत टिन-शैड बनाकर भी उपलब्ध कराया जाए। उन्होने कहा कि गौशालाओं में गाय के गोबर से उत्पाद बनाए जाएं, गाय के गोबर से बने उत्पाद ऑक्सीजन का बेहतर स्रोत है साथ ही गाय के गोबर की खाद जैविक खेती के लिए बेहतर साबित होगा, किसानों को रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर गौशालाओं से गाय के गोबर का खाद प्राप्त कर खेतों में प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जाए ताकि मिट्टी की सेहत में सुधार हो।सदस्य गौ-सेवा आयोग ने कहा कि जनपद की प्रत्येक गौशाला में कम से कम 01 सप्ताह का भूसा, दाना, पशुओं हेतु दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए, पशु चिकित्साधिकारी अपने अधीन प्रत्येक गौशाला में प्रतिदिन जाकर पशुओं की देखभाल करें, गौशालाओं में प्रतिदिन उपस्थिति के अनुसार ही भुगतान किया जाए, गौशालाओं के संचालन में किसी भी स्तर पर हेरा-फेरी न हो, पशुओं के चारे, दाने की किसी भी दशा में कटौती न की जाए, चारागाह की भूमि पर गौशालाओं में संरक्षित गौवंशों के लिए हरे चारे की बुवाई कराकर नियमित रूप से गौवंशों को खिलाया जाये, गौशालाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए गोबर-गोमूत्र, दूध का प्रयोग आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए किया जाए। उन्होने पशु चिकित्साधिकारियों से कहा कि संरक्षित सभी गौवंशों की शत-प्रतिशत ईयर टैगिंग करायी जाये, बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियें से बचाव हेतु टीकाकरण किया जाये, सभी गौशालाओं में पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध रहें, बीमार, कमजोर गौवंश की बेहतर देखभाल की जाये, सर्दी से बचाव हेतु गौशालाओं में मुकम्मल इंतजाम रहें। उन्होने बैठक में उपस्थित अपर पुलिस अधीक्षक से कहा कि पशु तस्करों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही हो, जो भी गौ सेवक पुलिस को सूचना दे, पुलिस उसकी बात ध्यान से सुन दोषियों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही करे।इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अनिल कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सोमदत्त, जिला कृषि अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप, जिला पंचायत राज अधिकारी यतेंद्र सिंह, जिला उद्यान अधिकारी ए.के. चतुर्वेदी सहित समस्त खंड विकास अधिकारी, अधिशासी अधिकारी नगर निकाय, पशु चिकित्साधिकारियों के अलावा सुमित चौहान, सिद्धनाथ पांडेय, मानसिंह चौहान, कुलदीप, अरविंद शर्मा, डॉ. सुनील कांत उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।

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