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कन्या का विवाह साधन नही साधना देख कर करे तो जीवन सुखमय होगा-आचार्य सुरेंद्र

मवई ब्लॉक के गायत्रीनगर में चल रही कथा का तीसरा दिन

रुदौली/अयोध्या रिपोर्ट मंडल ब्यूरो गोपीनाथ रावत- मवई ब्लॉक के गायत्रीनगर में जय प्रकाश मिश्र के यहां आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सृष्टि वर्णन करते हुए कथा व्यास आचार्य सुरेंद्र जी महाराज ने सामाजिक संबंधों के विषय में प्रकाश डालते हुए देवहूति कर्दम ऋषि के विवाह के प्रसंग को बताया।समाज की व्यवस्था को देखते हुए भगवत प्रवक्ता ने श्रद्धालुओं को निर्देश देते हुए कहा कि अपने कन्या का विवाह साधन व साधना दोनों से संपन्न वर के साथ में ही संपन्न करें तभी उनका दांपत्य जीवन व भविष्य उज्जवल हो सकता है।आगे कथा प्रवर ने मानव जीवन जीने के लिए बहुत ही सरल मार्ग बताते हुए कहा कि संसार के कार्य से जब हमें विश्राम मिलेगा तब हम भजन करेंगे।संसार के कार्य को करते हुए “हे भगवान” के नाम को जाप कर ही भजन किया जाए। यह उत्तम है इस विषय को मानस की चौपाई से सिद्ध करते हुए महाराज जी ने बताया “*कर से कर्म करहु विधि नाना,मन राखहु जहां कृपा निधाना*। कथा व्यास ने सृष्टि उत्पत्ति के विषय में बताते हुए कहा कि ब्रह्मा जी के दाहिने भाग से मनु जी एवं वाम भाग से सतरूपा जी का प्रादुर्भाव हुआ और इन्हीं दोनों से ही जगत में मनुष्य की उत्पत्ति हुई तभी से हम लोग मानव कहलाए।कथा के मध्य में सनातन धर्म पर प्रकाश डालते हुए व्यास जी ने कहा कि सनातन धर्म कोई मजहब नहीं है कोई पंथ नहीं है।सनातन धर्म ही भगवान का विग्रह है शास्त्रों में भगवान को सनातन नाम से पुकारा गया है।इसलिए सनातन धर्म विश्वव्यापी है इसे कभी मिटाया नहीं जा सकता।सनातन में समस्त जीवों की कल्याण की भावना है सबका आदर व सम्मान है।सनातन की रक्षा सड़कों पर आकर नहीं हो सकती।हृदय में जब तक सनातन के प्रति प्रत्येक भारतवासी निष्काम भाव से एक होकर रहेंगे तभी सनातन की अलख जागाई जा सकती है।इस अवसर पर मवई ब्लॉक प्रमुख राजीव तिवारी कृष्णावती रामनरेश डिग्री कालेज के प्रधानाचार्य डा0 रविशंकर शुक्ला प्रोफेसर डा0 सियाराम प्रोफेसर अजय मिश्र बृजेश मिश्र राजेन्द्र पांडेय शिवानंद मिश्र रामनरेश गुप्त रमेश रामवती आदित्य तिवारी, गुड्डू भारती, अमरनाथ गुप्त, अवधेश, गुड्डू रमापति गुप्त श्यामजी नेमचंद गुप्त सुधीर सोनी अनूप मिश्रा अर्पित , रमेश चंद्र आदि लोगों ने कथा का रसपान किया।

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