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सोहावल तहसील क्षेत्र के तालाब पट्टे में भी सिडिकेट का मामला

अयोध्या रिपोर्ट ब्यूरो गोपीनाथ रावत – सरकार की गरीब मछुवारों को रोजान्मुखी कर विकसित बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों को तालाब पट्टा आवंटन में सोहावल तहसील नीलामी में सिंडीक्रेसी का मामला सामने आया है।तीन दिन तक हुई बोली मे पात्र की जानकारी के आभाव के कारण 302 मे से महज 40 से 50 तालाबो की नीलामी ही हो सकी। सबसे अधिक चौकाने वाला जगनपुर के दो गाटा की लगभग 6.42 लाख की छूटी नीलामी ने पारदर्शिता बरते जाने की पोल खोल दी।बताया जाता है कि जगनपुर स्थित गाटा संख्या1293-1296 की नीलामी दस साल के लिए लगभग 6 लाख 42 हजार मे शिवकुमारी ने बोली लगाई। बाद मे अधिकारियों द्वारा एक साल के लिए पट्टा तथा घाटे का अंदेशा होने की जानकारी होने पर बोली पट्टा से बैरंग हो गयी। नियमतः बोली दाता के प्राप्त पट्टे के मना करने पर समकक्ष को पट्टा देने की प्रक्रिया शुरू होते ही दो पक्ष सादान के पैरोकार तथा अजय कुमार को पट्टा दिलाने के लिए तमतिल आमने सामने हो गये।तमसील ने उक्त मामले की शिकायत जिलाधिकारी अयोध्या एसडीएम सोहावल से लेकर तहसील प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी की मुख्यमंत्री पोर्टल पर पट्टे में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत की।शिकायतकर्ता के अनुसार नायब रौनाही तहसीलदार की देखरेख में हो रहे पट्टे में धनोपार्जन के लिए मुहिम मे पर्दे के पीछे से गरीबों के उत्थान के लिए चलाई गयी योजना अमीरों की रहनुमाई का खेल बनकर रह गयी है।इस बाबत में नीलामी अधिकारी नायब तहसीलदार रिशू जैन ने बताया कि तीन दिन की बोली मे 40 से 50 लाभार्थी आने के कारण 40 से 50 तालाबो का पट्टा हो सका।शेष के लिए अधिकारियो के दिशा निर्देश पर पुनः तिथि तय की जाएगी।एक साल के लिए हुए फार्म पर पट्टे देने का स्पष्ट प्रिट होने के बावजूर इंकार करने वाले बोली दाताओं को ही पट्टा निरस्त कर समकक्ष को पट्टा दिया जाएगा। सिंडिक्रेसी के आरोपो के बारे मे बताया कि समय समय पर तालाब का निरीक्षण होगा।किसी सिंडीक्रेसी की जानकारी होने पर पट्टा निरस्त भी किया जा सकता है।

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