India Times 7

Homeउत्तर प्रदेशसोमनाथ स्वाभिमान पर्व: सनातन आस्था और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का उत्सव

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: सनातन आस्था और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का उत्सव

रिपोर्ट भूदेव प्रेमी

सोमनाथ मंदिर भारत की सनातन संस्कृति, आस्था और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का जीवंत प्रतीक है। बीते एक हजार वर्षों का इतिहास इस बात का साक्षी है कि विदेशी आक्रांताओं की घृणा, कट्टरता और विध्वंस की नीति के बावजूद भारतीय सभ्यता की आस्था, साहस और सृजनशीलता सदैव अडिग रही है।आज बाबा सोमनाथ का जो भव्य और दिव्य स्वरूप देश-दुनिया देख रही है, वह लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की निष्ठा, देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अटूट आस्था, के.एम. मुंशी की जिजीविषा तथा लाखों सनातन धर्मावलंबियों के त्याग, तपस्या और बलिदान का प्रतिफल है।आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘नया भारत’ आज ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के रूप में सनातन संस्कृति के गौरव का उत्सव मना रहा है। यह पर्व न केवल अतीत के विध्वंस पर विजय का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि गजनी जैसे आतताइयों द्वारा किए गए विनाश के स्थान पर आज उल्लास, सृजन और वैभव का नव-अंकुर प्रस्फुटित हो चुका है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर कहा कि सोमनाथ मंदिर यह संदेश देता है कि सत्य, संस्कृति और आस्था को कभी पराजित नहीं किया जा सकता। यह पर्व गौरवशाली सनातन संस्कृति के अभिवर्धन और राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को और अधिक सशक्त बनाने की प्रेरणा देता है।सोमनाथ स्वाभिमान पर्व वास्तव में उस अटूट विश्वास का प्रतीक है, जिसने भारत की आत्मा को सदैव जीवित और प्रखर बनाए रखा है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular