रिपोर्ट गोपीनाथ रावत
मिल्कीपुर- अयोध्या महाराजा बिजली पासी का किला बढई का पुरवा सहादतगंज अयोध्या में वीरांगना ऊदा देवी पासी का 168वा शौर्य दिवस एवं महाराजा बिजली पासी की मूर्ति की 22 वा स्थापना दिवस बड़े धूमधाम से मनाया गया इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ डी आर भुवन रेडियोलॉजिस्ट ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हम वीरांगना ऊदा देवी पासी को नहीं भूल सकते हैं। स्वतंत्रता संग्राम में अनेक वीरों/ वीरांगनाओं ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की कुर्बानी दे दी है। *उनका नाम इतिहास के पन्नों में नहीं है उनका नाम छुपाया गया है* जिनका नाम इतिहास के पन्नों में होना आवश्यक था उसी में से वीरांगना ऊदा देवी पासी भी हैं पासी समाज को दबाया गया है और पासी समाज के इतिहास को मिटाया गया है इसे पासी समाज को समझना चाहिए ।उन्होंने वीरांगना ऊदा देवी पासी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विचार रखते हुए कहा कि देश की आजादी में और समाज के लोगों के साथ पासी समाज का बड़ा योगदान रहा है प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की लड़ाई में महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया ।हम उनका सम्मान करते हैं पासी समाज के लोगों से मेरी अपील है कि वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा, अच्छा तालीम ,रोजगार , व्यवसाय दें जिससे समाज सुधरे और शक्तिशाली बने समारोह को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि चंद्रबली पासी ने भी पासी समाज के राजाओं महाराजाओं का नाम जयकारों के साथ लिया और उनके द्वारा किए गए समाज के प्रति कार्यों कृतियो का वर्णन किया ऊदा देवी पासी के विषय में कहा वीरांगना ऊदा देवी पासी के पति मक्का पासी बेगम हजरत महल की सेवा में एक सैनिक थे जो अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए चिनहट में वीरगति को प्राप्त हो गए थे ऊदा देवी पासी बटालियन की सेनापति थी। जो अपने पति की शहादत का बदला लेने के लिए आतुर थी उन्होंने धैर्य और अदम्य साहस से काम किया शीघ्र ही सिकंदरा बाग लखनऊ में मौका मिल गया उन्होंने अपनी बंदूक से 36 अंग्रेजों को मार गिराया और अपने पति मक्का पासी के शहादत का बदला चुकाया शौर्य दिवस को संबोधित करते हुए मस्तराम पासी समाजसेवी ने कहा हमें अपने पूर्वजों महापुरुषों का सम्मान करना चाहिए उन्होंने महाराजा बिजली पासी, महाराजा लाखन पासी, महाराजा सुहेलदेव पासी, राजा सातन पासी, महाराजा बिजली पासी के जीवन पर प्रकाश डाला ।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राम अवध सी एच आई ने कहा कि वीरांगना ऊदा देवी पासी 1857 की संग्राम में अंग्रेजी क्रांतिकारियों का डटकर मुकाबला किया इनका जन्म लखनऊ के पास उजिरियावा गांव में हुआ था ।इनके प्रति लोकगीत हैं— *कोई उनको हबसी कहता, कोई कहता नीच अछूत*अबला कोई उन्हें बतलाए कोई कहे उन्हें मजबूत* कार्यक्रम का कुशल संचालन हनुमान प्रसाद पासी कल्याण महामंत्री ने किया । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पासी कल्याण परिषद के जिला अध्यक्ष राम और पासी ने कहा कि 10 मई 1857 से शुरू हुई चिनहट की लड़ाई अंग्रेजी सेना हेनरी लॉरेंस की फौज मैदान छोड़कर भाग खड़ी हुई इसी पूर्व लड़ाई में ऊदा देवी पासी के पति मक्का पासी मारे गए थे उन्हीं के शहादत का बदला चिनहट के महासंग्राम की अगली बड़ी सिकंदरा बाग की लड़ाई 16 नवंबर 1857 को बोलिन कैंपबेल के नेतृत्व में हुई जिसमें ऊदा देवी पासी पुरुष पोशाक में लखनऊ के सिकंदरा बाग के एक पीपल के पेड़ पर चढ़कर 36 अंग्रेजी सैनिकों को मार गिराया वाजिद अली शाह ने स्त्रियों का एक सुरक्षा दत्ता बनाई थी जिसकी कमांडर वीरांगना ऊदा देवी पासी थी। इसी लड़ाई में अंग्रेजी अफसर कपूर और लेक्सडन समेत 36 अंग्रेज सैनिक मारे गये। हम वीरांगना ऊदा देवी पासी का जितना भी तारीफ करें उतना ही कम है उनके अदम्य साहस को हम सलाम करते हैं कार्यक्रम को चंद्रबली, लल्लन ,सोहनलाल, माताफेर पासी सीबी भारती, धमसादीन पासी, रामधनी पासी ,राम कलप पासी , विजय कुमार ,राजपाल, श्याम बाबू, रामकरन,जयप्रकाश भारती, रामनाथ मास्टर, योगेंद्र चौधरी, घनश्याम ,विद्यावती ,रेखा ,मालती, सूरसता, सालिकराम पासी, संजय पासवान, राजित राम पासी, उमेश चंद्र ,शैलेंद्र पासी ,गुरु प्रसाद पासी, लल्लन पासी, गंगाराम पासी, मालिक राम पासी, राजेंद्र प्रसाद पासी, राजेंद्र बहादुर ,रामतेज पासी, राम लखन पासी, दिनेश कुमार पासी ,डॉ अजय प्रताप, रामचंद्र पासी समेत तमाम वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखें इस शौर्य दिवस के कार्यक्रम में बडी संख्या में पासी समाज के लोग मौजूद रहे।
