India Times 7

Homeबदायूंसरकार की उदासीनता से आशा कर्मियों में भारी आक्रोश

सरकार की उदासीनता से आशा कर्मियों में भारी आक्रोश

रिपोर्ट भूदेव प्रसाद

बदायूं।आशा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का आज 44वां दिन पूरा हो गया, लेकिन अब तक सरकार ने रुकी हुई वार्ता को आगे बढ़ाने और उनकी मांगों को पूरा करने में कोई रुचि नहीं दिखाई है। सरकार की इस उदासीनता से आशा कर्मियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।मालवीय मैदान में जारी धरने के दौरान आशा कर्मियों ने मुख्यमंत्री को अपने खून से पत्र लिखने का निर्णय लिया था, लेकिन आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) के प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही के आग्रह पर इस निर्णय को सामूहिक रूप से स्थगित कर दिया गया। हालांकि जिलाध्यक्ष जॉली वैश्य ने आज अपने श्रम और संघर्ष से सींचे गए खून से मांग पत्र लिखकर उसमें आशा कर्मियों की सभी मांगों को दर्ज किया।बताया गया कि यह खून से लिखा गया मांग पत्र कल दिनांक 29 जनवरी 2026 (बृहस्पतिवार) को माननीय जिलाधिकारी के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा।धरने को संबोधित करते हुए जिला उपाध्यक्ष निर्दोष ने कहा कि सरकार ने पिछले 20 वर्षों में आशा कर्मियों के खून की एक-एक बूंद निचोड़ ली है। जो थोड़ा-बहुत खून बचा था, उसे भी प्रदेश की सत्ता में बैठे बहरे लोगों को सौंपने का इरादा था, लेकिन ऐक्टू के प्रदेश अध्यक्ष एवं सभी के संरक्षक के आग्रह पर इस कदम को रोक दिया गया।उन्होंने सरकार की संवेदनहीनता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कड़ाके की ठंड में बदायूं सहित पूरे प्रदेश की एक लाख से अधिक आशा कर्मी खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठीं रहीं। सीएचसी से लेकर मुख्यालय, मंडल और राजधानी तक सड़कों पर संघर्ष करती रहीं, लेकिन सरकार केवल अपना चेहरा बचाने में लगी रही और नौकरशाही झूठ व उत्पीड़न का सहारा लेती रही।जिलाध्यक्ष जॉली वैश्य ने कहा कि केंद्र सरकार आगामी 2 फरवरी को अपना बजट प्रस्तुत करने जा रही है। ऐसे में 45वें और 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को राज्यों में लागू कराने के दबाव हेतु 30 जनवरी को“गांधी–भगत सिंह–अंबेडकर के रास्ते, आशा कर्मियों के बेहतर जीवन के वास्ते”नारे के साथ सभी मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 9 फरवरी को एक बार फिर लखनऊ कूच किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस बार राजधानी से खाली हाथ लौटने का सवाल ही नहीं है, मांगें पूरी होने तक डेरा डालकर संघर्ष जारी रहेगा।धरने को संबोधित करते हुए जिला सचिव मुनीषा ने कहा कि 30 जनवरी के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी को भारी संख्या में शामिल होना होगा और 9 फरवरी को राजधानी में प्रस्तावित “घेरा डालो” आंदोलन की तैयारी अभी से तेज करनी होगी।आज के धरने को मुनीषा, विमला, नीलम, भावना, रेशमा, तस्लीमन, सरिता, प्रतिमा, बेसाबती, गिरिजा सहित कई आशा कर्मियों ने संबोधित किया।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular