पाप करें और मजे काटे, यह ईश्वरी व्यवस्था में नहीं, ईश्वरीय व्यवस्था को भूलने के कारण ही झेलनी पड़ती हैं दुश्वारियां-महानिदेशक उपाम
मैनपुरी प्रमुख सचिव समाज कल्याण एवं सैनिक कल्याण तथा महानिदेशक उपाम एल. वेंकटेश्वर लू ने “कर्मयोग, अभ्युदय एवं विकसित भारत’ संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुये कहा कि कर्मयोग ोग से जिसने अपने चित्त चित्त को धोया है, उसे ही ईश्वरीय सत्त सत्ता का बोध हुआ है, धर्म का मतलब प्रेम है, स्वार्थ, छल-कपट करने वाले को ईश्वरीय स्पर्श नहीं हो सकता, ईश्वरीय स्पर्श से मन शांत होता है, दूसरों को धोखा देने वाला कभी सुकून से नहीं रह सकता, बिना संघर्ष के कोई भी व्यक्ति जीवन में आगे नहीं बढ़ सकता, जीवन में उन्नति नहीं कर सकता। उन्होने कहा कि मानव यदि अपनी सिद्धि को बरकरार रखे तो वह बहुत आगे जा सकता है, भारत भूमि कीविशेषता है कि हर एक चीज को ऋषि-मुनियों ने संदिग्धता को खतम करने के लिए हजारों साल तपस्या की, उन्होने एक निश्चित व्यवस्था को देखा है, बाहर का विज्ञान, अपनी बुद्धि से तैयार किया हुआ विज्ञान भ्रम पैदा करता है, ऋषि-मुनियों ने ऐसी चीजों को देखा है जो निश्चित है। उन्होने कहा कि विज्ञान कहां उपयोग होता है, कैसे कार्य करेगा यह सभी के दिमाग में फीड है. किसको कहा उपयोग करना चाहिए यह विवेक चाहिए व्यक्ति बहुत सारी चीजों को पढ़ता है लेकिन कौन सी चीज कहा उपयोग करे, कैसे उपयोग करें यह आपको कोई नहीं बतायेगा ग्रह आपको स्वयं ही निर्धारित करनी होगी।महानिदेशक उपाम ने कहा कि आज बच्चे माता-पिता की बात नहीं सुनते हो सकता है कि माताओं में बाहरी, ससारिक ज्ञान की कमी हो लेकिन खान-पान, रहन-सहन के बारे में बहुत ज्यादा जानती है लेकिन बच्चों में संस्कार की कमी के कारण वह माँ की बात न सुन उल्टा-सीधा भोजन कर रहे हैं, बच्चे मोबाइल, टीबी पर प्रचार देखकर क्या खा रहे हैं, इससे खाने से आपकी सेहत पर क्या प्रभाव पड़ेगा इससे मार्केट वालों को कोई लेना-देना नहीं है कुरकुरे, पिज्जा, चिप्स जाने क्या-क्या खाकर अपनी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं, जिससे बहुत ही गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं, पहले हार्ट की समस्या थी ही नहीं लेकिन आज हार्ट की समस्या बच्चों में भी देखने को मिल रही है, हार्ट का पल्सरेट बढ़ रहा है, इस पर हम सबको बहुत ही गंभीरता पूर्वक विचार करने की आवश्यकता है। उन्होने कहा कि शिक्षक भी छात्रों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते, यही कारण है कि आज कल के बच्चे बहुत बिगड़ रहे हैं, खान-पान के साथ उनकी जीवनशैली में तेजी से बदलाव हुआ है, हमें मिलकर बच्चों को संस्कारवान बनाना होगा यदि देश के भविष्य बच्चे संस्कारवान नहीं होंगे, उनकी सेहत ठीक नहीं होगी तो हमारे देश का विकास अवरूद्ध होगा।प्रमुख सचिव ने कहा कि सत्य पर चले बिना कोई सुखी नहीं हो सकता, सत्य ही सुख देता है, लेकिन आप सबको सत्य आसानी से दिखाई नहीं देगा, क्योंकि सत्य का स्वरूप ही आनंद है, सत्य ही राम है, सत्य ही ईश्वर है, ईश्वर ही सत्य है यह दोनो अलग-अलग नहीं है, ईश्वर का मतलब आनन्द है, आनन्द प्रत्येक व्यक्ति चाहता है, संसार में यहां व्यक्ति सुख के लिए दौड़ रहा है, लेकिन यहां सुख कम है दुःख ज्यादा है, ईश्वरीय सत्ता को पहचाने बिना संसार के मायाजाल में लोग डूबते हैं, हमारे शास्त्रों में ऋषि-मुनियों, संतो ने सत्य को देखा है, हरि की व्यवस्था के प्रतिकूल जाने वाला कभी सुखी नहीं हो सकता। उन्होने कहा कि आज बच्चों को पढ़ने, शिक्षकों को पढ़ाने में रूचि नहीं है, शिक्षक को पैसों से मतलब रह गया है और बच्चों को अच्छे अंक मिल जाते हैं तो वह मटरगस्ती करते रहते हैं, समाज, देश का क्या होगा यह चिंता किसी को नहीं है, जो व्यक्ति अपने को योग्य समझता है उसको ज्यादा चिंता होनी चाहिए, देशभक्ति, राष्ट्रभक्ति फडांमेंन्टल हर व्यक्ति को सीखना पड़ेगा।जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुये कहा कि आज हम सबका परम सौभाग्य है, आज हमें महान व्यक्तित्व को सुनने का अवसर प्राप्त हुआ, प्रमुख सचिव को वेद-पुराण, उपनिषद, गीता, कबीर मंत्र सभी पहलुओं की गहरी जानकारी है। उन्होंने कहा कि वाह्य जगत महत्वपूर्ण है है लेकिन वाह्य जगत के विका विकास के साथ-साथ अंतर जगत का विकसित होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि समाज को बनाने में सभी का योगदान होता है। उन्होंने कहा कि आज हमने तर्क-वितर्क करना छोड़ दिया है, आज लोगों में सिर्फ कुतर्क करने की आदत विकसित हो गई है।पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद शाहा ने कहा कि प्रत्येक समाज को चुनौतियों से जूझना पड़ता है, जब समाज प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा था तब ग्रामीण परिवेश में रहने वाले और शहरी सभ्यता में जीने वालों के बीच तनाव था, आज हम आधुनिक युग में जी रहे हैं, आज हमारे सामने सत्य को मानने की चुनौती है, यह परम सत्य है कि हम अपने अतीत को भुला नहीं सकते लेकिन आधुनिक ज्ञान की जानकारी भी बेहद जरूरी है, पुरानी सभ्यता के साथ-साथ नई टेक्नोलॉजी से भी तालमेल बिठाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों के साथ-साथ शिक्षकों का परम कर्तव्य की वह अपने बच्चों, छात्रों को बेहतर मार्ग पर चलने के साथ संस्कारबान बनाने में अपना योगदान दें, बच्चों में व्याप्त बुराइयों को दूर करने में उनका सहयोग करें।मुख्य विकास अधिकारी नेहा बंधु ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि अपने सेवाकाल के छोटे से कार्यकाल में बहुत कुछ सीखा है, ज्यादातर लोग भूतकाल, भविष्यकाल में जी रहे हैं, वर्तमान में जीने के लिए बड़ी ताकत चाहिए, अपने अंदर की कमियों को पहचान कर उन्हें दूर करना होगा, हमें पहले स्वयं का विश्लेषण करना होगा, किताबों को अपना दोस्त बनना होगा, पुस्तकें ज्ञानार्जन का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होने कहा कि आज हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती सही और गलत की पहचान करना है, आजकल ज्यादातर लोगों में दिखावा ज्यादा है, यह समाज के सामने बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञ चन्द्रशेखर ने भी संगोष्ठी में विस्तार से दायित्वों, कर्तव्यों पर प्रकाश डालते हुये कहा कि सभी अधिकारी नेतृत्व देकर अपने-अपने विभाग की योजनाओं का धरातल पर क्रियान्वयन करायें, अधीनस्थों को नेतृत्व नेतृत्व देकर देकर उन्हें कार्य सिखाने में अपना मार्गदर्शन दें।
संगोष्ठी में अपर जिलाधिकारी श्यामलता आनंद, अपर पुलिस अधीक्षक अरूण कुमार, उपायुक्त एन.आर.एल.एम. शौकत अली, जिला बिकास अधिकारी अजय कुमार, परियोजना निर्देशक डी.आर.डी.ए. सत्येंद्र कुमार, उपायुक्त मनरेगा श्वेतांक पांडेय, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अनिल वर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी अशोक कुमार, उपायुक्त उद्योग उत्कर्ष चंन्द्र, जिला आबकारी अधिकारी दिनेश कुमार, जिला विद्यालय सतीश कुमार, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी पवन यादव, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी दीपिका गुप्ता, जिला कार्यक्रम अधिकारी हरिओम बाजपेयी सहित अन्य अधिकारी, विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य, छात्र-छात्राएं आदि उपस्थित रहे।