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शिक्षक पवन भारती की पहल से बदली ‘शिक्षा के मंदिर’ की तस्वीर

इस सरकारी विद्यालय में सुविधाओं को देख रह जाएंगे हैरान

बदायूं :आज के दौर में बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए अभिभावकों को मोटी रकम खर्च करना पड़ता है.बात अगर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की हो तो लोगों के जेहन में सबसे पहले बड़े और नामी प्राइवेट स्कूलों का नाम आता है, जहां बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के बदले अभिभावकों से मोटी फीस वसूली जाती है. वहीं, ठीक इससे उलट सरकारी विद्यालय जो गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई और सुविधाओं के मामले में प्राइवेट स्कूल से कहीं आगे है. ये स्कूल प्राथमिक विद्यालय बसेला विकास खंड दातागंज बदायूं जिले में स्थित है. यहां के शिक्षकों का कमाल ये है कि न सिर्फ बच्चों को अच्छी शिक्षा मुहैया कराते हैं, बल्कि ये शिक्षक दूसरे अभिभावकों को भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करते हैं

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आइए जानते हैं इस विद्यालय की कहानी.

1) सम्पूर्ण कक्षा कक्ष में टाइलीकरण(प्रधान निधि)2)किचेन शेड(प्रधान निधि)3) सुविकसित पुस्तकालय फर्नीचर सहित4)स्मार्ट क्लास(एलईडी टीवी)5)संपूर्ण शौचालय टाइलीकरण6)अतिरिक्त शौचालय निर्माण(प्रधान निधि)7) सबमर्सिबल(प्रधान निधि)8) फर्नीचर9) संपूर्ण विद्यालय का पेंटिंग(प्रधान निधि)10) आंगनवाड़ी भवन का टाइलीकरण(प्रधान)11) आंगनवाड़ी भवन पेंटिंग(प्रधान निधि)12) विद्यालय की बाउंड्री और गेट13) विद्युतीकरण14) समस्त कक्षा कक्ष में पंखे15) समस्त कक्षा कक्ष के लर्निंग कॉर्नर16) सुविकसित और स्वनिर्मित पूर्ण TLM कक्ष17) समस्त कक्षा कक्ष में पाइप पर्दे फिटिंग18) प्राथमिक स्तर पर स्काउट कैंप 19) बच्चों के आई कार्ड20) संपूर्ण विद्यालय में गमले, हैज और फायकस के पौधे21) इनवर्टर से पूर्ण22) सीसीटीवी कैमरा से पूर्णये वो सारी चीजें है जिन्हें अपने 5 वर्ष के कार्यकाल में प्रति वर्ष मिलने वाली कंपोजिट ग्रांट और ग्राम प्रधान द्वारा सहयोग के माध्यम से पूरे किए है इसके अतिरिक्त ऐसी बहुत सारी चीजें है जिन्हें मेंशन नहीं किया है जिन्हें अक्सर करता रहता हूँ। 5 वर्ष के कार्यकाल से पूर्ण रूप से संतुष्ट हूँ , पवन भारती ने कहा कि किसी से कोई शिकायत नहीं है। बस अफसोस है कि 3-4 चीजें अभी भी विद्यालय में मै नहीं दे पाया हूँ पता नहीं वो कब तक दे पाऊंगा साथ ही उम्मीद भी है कि बहुत जल्द उन्हें भी विद्यालय में करवाकर विद्यालय को पूर्ण रूप से डिजिटल और आधुनिक बना दूंगा। सफर आसान था भी और नहीं भी क्योंकि अपने ही गांव और अपनी ही प्रधानी में मैने बहुत विरोध सहन किया है कभी लोगों का, कभी स्टाफ का तो कभी अपने ही परिवार के लोगों का लेकिन मैने अपनी जिद नहीं तोड़ी और आज जब विद्यालय को 5 वर्ष पूर्ण होने पर देखता हूँ तो ईश्वर को धन्यवाद करता हूँ और स्वयं को भी धन्यवाद करता हूँ। 7 दिसंबर 2020 को मुख्यालय पर और 30 जनवरी 2021 को विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करके प्रभारी का दायित्व संभाला और आज 5 वर्ष पूर्ण हो चुके है।

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