एलाऊ रिपोर्ट मोनू – ब्लॉक जागीर क्षेत्र के गांव एलाऊ में चल रही श्रीराम कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भीड़ कथा सुनने के लिए उमड़ी। कथावाचक ने अनेकों प्रसंग सुनाए। कृष्णानंद महाराज ने कहा मंत्री सुमंत विदा कर रामगंगा तट पर केवट से नाव मांगते हैं। रात की पहरेदारी के समय लक्ष्मण निषाद की वार्ता से केवट जान गया कि राम ही ब्रह्मा हैं। राम से कहता है कि मैं तुम्हारा मर्म जानता हूं। आपके चरण रज की स्पर्श मात्र से पत्थर से जो अहिल्या स्त्री बन गई। मेरी काठ की नाव स्त्री बनेगी नाम तो मेरी आजीविका का साधन है और दो स्त्री हो गई तो खर्च बढ़ेगा। इसलिए आपके चरण धोऊंगा और मेरी बात मंजूर न हो तो थोड़ी दूर पर उथला स्थान है। वहां बिना नाव के चले जाना मैं जानता हूं कि आप तीनों तैरना ही नहीं जानते। मैं भीख मांगकर भी आपसे नहीं कहूंगा कि आप पैर धुला ले, भक्ति में ऐसा ही आत्मविश्वास होना चाहिए। जिसकी भक्ति में मांगना नहीं रहता वहीं वही धन्य है। मैं आपसे कोई उतराई भी नहीं लूंगा, मैं आपकी आन और दशरथ की सौगंध खाता हूं। बिना पग धोए नाव पर नहीं चढ़ाऊंगा। लक्ष्मण क्रोधित होकर बाण चढ़ा लेते हैं। आगे हनुमानजी के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लोगों ने जब हनुमानजी से कहा कि आप भगवान श्रीराम की सेवा के लिए ही अवतरित हुए हैं। तो आप उनके कार्य पूरे करो। इस पर हनुमानजी ने लंका जाकर रावण को मारने और माता सीता को वापस लाने की बात कही। जिसे सुन सभी लोग डर गए और ऐसा करने से मना कर दिया। आचार्य जी ने वर्तमान सामाजिक व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज कलयुग की मार से बूढ़ा बाप लंगड़ा हो गया है और बेटा अंधा हो गया है। यदि समाज में भ्रष्टाचार और आतंकवाद को मिटाना है तो ताकत युवा की और दिमाग किसी बुजुर्ग का, जोश जवान का और होश बुढ़ापे का साथ होना जरूरी है। तभी पूरे राष्ट्र का उत्थान हो सकेगा। कथा के अंत में आचार्य जी ने श्रीराम के राजतिलक के साथ कथा का विश्राम किया। इस मोके पर डॉ सूरजपाल चौहान, प्रवेश मिश्रा, आंनन्द मिश्रा, शिवप्रताप चौहान, सूर्यप्रताप भदौरिया, चंदप्रकाश भदौरिया, मानसिंह तोमर, स्वदेशी अग्निहोत्री, महिपाल चौहान, सुनील तोमर आदि सैकड़ो लोग मौजूद थे।