मैनपुरी कुरावली में इस बार दशहरे की रात का नज़ारा कुछ अलग ही रहा। शाम होते-होते जब राम और लक्ष्मण मंच पर धनुष-बाण थामे खड़े थे, तभी आसमान से रिमझिम बारिश की बूंदें बरसने लगीं। कुछ ही देर में मैदान की रौनक फीकी पड़ गई और रावण का अहंकार बारिश के आगे झुक गया।कुरावली ही नहीं, बल्कि आसपास के कस्बों और गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग रावण दहन देखने पहुंचे थे। पूरा मैदान खचाखच भरा था, हर कोई उस पल का इंतज़ार कर रहा था जब बुराई का अंत होगा और रावण का पुतला जल उठेगा। लेकिन जैसे ही बारिश तेज़ हुई, पुतला भींग गया और आग की चिंगारी बुझ गई।रामलीला मेला कमेटी के अध्यक्ष मनोज गुप्ता उर्फ पिंटू ने बताया कि रावण दहन की सभी तैयारियां पूरी थीं। मंच सजा था, सुरक्षा व्यवस्था पुख़्ता थी, पुलिस-प्रशासन के अधिकारी मौके पर तैनात थे, लेकिन तेज़ बारिश के कारण कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब बुधवार को रावण दहन किया जाएगा।बारिश के कारण लोगों में निराशा जरूर दिखी, लेकिन दृश्य कुछ ऐसा था कि मानो प्रकृति खुद रावण के अहंकार को झुका रही हो। भींगा हुआ पुतला मैदान में खड़ा रहा, और लोग उस अधूरे दृश्य को कैमरों में कैद करते नजर आए।*कुरावली की यह रात यादगार बन गई*— क्योंकि रावण भले ही न जला हो, मगर बारिश ने उसके घमंड की ज्वाला ठंडी कर दी। बारिश बनी वरदान… और रावण को मिला एक दिन का जीवनदान।