मैनपुरी- जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने जब से जनपद में कार्यभार ग्रहण किया है तब से निरंतर अनाधिकृत कब्जा करने वालों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही हो रही है, वह सार्वजनिक भूमि यथा चकरोड, तालाब, विद्यालय, चारागाह की भूमि, मरघट, खलियान पर किए गए अनधिकृत कब्जों को लेकर बेहद संवेदनशील हैं, सार्वजनिक भूमि पर अनाधिकृत कब्जों की शिकायतों पर स्वयं मौके पर जाकर शिकायत की हकीकत परख अपने सामने ही अवैध अतिक्रमण हटवाकर भूमि को खाली करा रहे हैं, जिन चकमार्गों से अनाधिकृत कब्जे हटाए गए हैं, उन पर संबंधित खंड विकास अधिकारियों को मिट्टी का कार्य करने की सख्त हिदायत दी गई है, एक बार कब्जा हटवाने के बाद यदि किसी के द्वारा पुनः कब्जा किया गया है तो ऐसे लोगों को भू-माफिया में चिन्हित कर प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है, सार्वजनिक भूमि के अलावा निजी भूमि पर भी अनाधिकृत रूप से किए गए कब्जों को लेकर भी बेहद सजग है, निजी भूमि पर अनाधिकृत कब्जों से संबंधित शिकायतों पर राजस्व, पुलिस की टीम मौके पर भेज कर प्रभावी कार्यवाही हो रही है. जिससे आम लोग भी राहत महसूस कर रहे हैं, सार्वजनिक भूमि से अनाधिकृत कब्जे हटवाने में लापरवाही बरतने वाले राजस्व कर्मियों के विरुद्ध निलंबन की कार्यवाही की गई है, वैधानिक कार्यवाहियों के चलते भू-माफिया के बीच भय व्याप्त है।● आज जन-सुनवाई के दौरान जब ग्राम अस्यौली नि. गुरूमीत सिंह, अमित, बीनू यादव, जनार्दन सिंह ने अपने शिकायती प्रार्थना पत्र के माध्यम से बताया कि भू-माफियाओं ने गाटा संख्या-308, 452 रकवा लगभग 500 बीघा पर वर्ष 1986-87 में भूलेखों पर अपने-अपने नाम दर्ज करा लिये थे तथा तालाब की आराजी पर खेती करने लगे, जब जिला प्रशासन को तालाब की फर्जी जानकारी हुयी तो राजस्व की धाराओं में कार्यवाही कर 2005 में नाम निरस्त कर तालाब की आराजी को पुनः भू अभिलेखों में तालाब दर्ज करा दिया गया, जो आज भी दर्ज है परंतु भू-माफियाओं ने विभिन्न न्यायालय में जिला प्रशासन द्वारा किये गये आदेश के विरूद्ध निगरानी की, सुनवाई के बाद निरस्त कर दी गयी एवं जिला प्रशासन का आदेश यथावत् रखा,भू-माफियाओं ने उच्च न्यायालय में अवर न्यायालय के विरूद्ध तथ्यों को छिपाते हुये रिट याचिका दायर कर स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया लेकिन जिला प्रशासन द्वारा उक्त प्रकरण में काउटर नहीं लगवाया, जिससे विचाराधीन रिटों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है और भू-माफियाओं द्वारा लगभग 500 बीघा जमीन पर गेहूं की बुवाई कर दी है, जिसे गंभीरता से लेते हुये वह स्वयं मौके पर पहुंचे और क्षेत्रीय लेखपाल, तहसीलदार से प्रकरण की जानकारी करने पर पाया कि उक्त भूमि पर स्टे लिया गया है लेकिन लेखपाल को जानकारी नहीं थीं, तालाब की भूमि होने के बावजूद धारा-67 में भी कोई कार्यवाही नहीं की गयी, जिस पर उन्होने उप जिलाधिकारी सदर को लेखपाल को निलम्बित करते हुये विभागीय कार्यवाही के आदेश दिये।उन्होने नाराजगी व्यक्त करते हुये उप जिलाधिकारियों, तहसीलदारों से कहा कि बार-बार निर्देशों के बाद भी सार्वजनिक भूमि से अवैध अतिक्रमण नहीं हटाये जा रहे हैं, उप जिलाधिकारी अभियान चलाकर अपने-अपने क्षेत्र के सार्वजनिक स्थलों से तत्काल अनाधिकृत कब्जे हटवायें, जनपद में भूमि पर जबरन कब्जे की लगातार शिकायतें प्राप्त हो रहीं हैं यद्यपि अनाधिकृत कब्जे की शिकायतों पर प्रभावी कार्यवाही हो रही है लेकिन अभी और सख्ती की आवश्यकता है, राजस्व विभाग के कार्मिक अपने-अपने क्षेत्र की सार्वजनिक भूमि की पूरी जानकारी रखें, कहीं भी सरकारी जमीन पर कब्जा न हो, सुनिश्चित किया जाये।इस दौरान उप जिलाधिकारी सदर अभिषेक कुमार, तहसीलदार विशाल सिंह, अनिल सक्सैना, आई.जी.आर.एस. प्रभारी अनुज कुमार आदि उपस्थित रहे।