बिछवां – संसार में जब जब अत्याचार बढ़े हैं प्रभु ने विभिन्न रुपों में अवतार लेकर दुष्टों का संहार किया है साथ ही प्रभु की लीला समझना हर किसी के वश की बात नहीं है। जो मोह माया से व्यक्त होता है वह इस आडंबर की दुनिया से काफी ऊपर तक पहुंच जाता है। यह बातें ग्राम सिमरई में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा वाचक व्रजविहारी महाराज ने कहीं। कथा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि क्रष्ण ने कंस का वध करने के बाद मथुरा को अत्याचार से मुक्त कराया। जब कंस के पापों का घड़ा भर गया तो क्रष्ण को कंस का वध करना पड़ा। कथा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस संसार में में मनुष्य अपने कर्मों का फल उसे अवश्य भोगना पड़ता है। वह चाहे कोई भी कितना भी जतन कर ले लेकिन कर्म का लिखा हुआ कोई मेंट नहीं सकता। विधि का विधान बदल सकता है लेकिन कर्म का लिखा कभी नहीं बदल सकता है। मनुष्य ने जैसा भी कर्म किया है उसका परिणाम उसे यहां अवश्य मिलेगा। आज संसार में लोग मायावी जाल में उलझकर तरह तरह के अपराध करते नजर आ रहे हैं लेकिन इस संसार में इस तरह के जो भी क्रत्य करते हैं उन्हें उसका भोगना पड़ता है। कथा में उन्होंने क्रष्ण और सुदामा का वर्णन करते हुए सुंदर लीला का वर्णन किया । इस अवसर पर नीरज चौहान,नीलम चौहान, वीरेन्द्र सिंह राठौर, मुन्नी देवी, सत्यपाल सिंह, राजकुमार, राजीव सिंह, विमल सिंह, दिनेश सिंह चौहान, योगेश सिंह, रामवीर सिंह राकेश सिंह,अभय छुटकू तोमर केशव सिंह प्रशांत तोमर गोविन्द आदि लोग मौजूद रहे आदि लोग मौजूद रहे।
जब जब संसार पर हुआ अत्याचार प्रभु ने अवतार लेकर किया संहार
Sourceरिपोर्ट अवनीश कुमार
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