रिपोर्ट अशोक कुमार
शाहजहाँपुर । यह देश की तथाकथित लोकतांत्रिक व्यवस्था का विद्रूप चेहरा है कि न्यायपालिका भी आम सरकारी विभागों के नक्शेकदम पर चलकर नित नये रिकार्ड बना रही है दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के घर आग बुझाने गए फायर बिग्रेड ने वहाँ करोडों नोटों को बरामद किए । भले ही बाद में फायर बिग्रेड वाले भी अपने बयान से मुकर गए और स्वयं न्यायमूर्ति ने इन्हें अपना मानने से ही इनकार ही कर दिया है जैसे लोग अपनी काली कमाई को बैंक लाकर्स में छुपा कर रखते हैं वैसे ही क्या न्यायाधीश के घर से ज्यादा सुरक्षित लाकर्स कहीं ओर हो सकते हैं पदेन न्यायाधीश जैसा रक्षक और कहाँ मिलेगा ! न्यायपालिका में सीसीटीवी कैमरों के सामने खुलेआम पैसा लेते विभागीय बाबू ,कर्मचारी क्यों किसी से डरें !! उनसे तो लोग स्वयं ही डरते हैं ऊपर से उनके भ्रष्टाचार की जाँच उनके ही बड़े करेगें तो डर काहे का !! सैंया भए कोतवाल वाली कहावत यहीं चरितार्थ होती है ऊपर से देश की राजनीति , समस्त प्रशासनिक विभागों मे यही हो रहा है जाहिर है मीठा मीठा गप गप ,कडुवा कडुवा थू ।