रिपोर्ट ब्रजेश पाल सिंह
बरेली/आंवला। केंद्रीय बजट 2026 को लेकर देशभर में प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। इसी कड़ी में आंवला से सांसद नीरज मौर्य ने बजट पर कड़ी नाराज़गी जाहिर करते हुए केंद्र सरकार पर उत्तर प्रदेश की घोर उपेक्षा का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा और जनसंख्या की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण राज्य होने के बावजूद बजट में उत्तर प्रदेश का एक बार भी ज़िक्र नहीं किया गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक है।सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश किसान, मजदूर, गरीब, दलित, पिछड़े और कमजोर वर्गों का प्रदेश है। यहां की अर्थव्यवस्था कृषि और श्रम पर आधारित है, लेकिन बजट में न तो किसानों के लिए कोई ठोस योजना लाई गई, न मजदूरों के हित में कोई बड़ा ऐलान हुआ और न ही गरीब तबके को राहत देने की कोई पहल दिखाई दी। उन्होंने कहा कि यह बजट आम जनमानस की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरने में विफल रहा है।नीरज मौर्य ने आगे कहा कि बजट के बाद जिस तरह से शेयर बाजार धराशायी हुआ और कमोडिटी बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली, उससे साफ है कि यह बजट न केवल आम लोगों बल्कि निवेशकों और व्यापार जगत का भी भरोसा जीतने में असफल रहा है। बाजार की प्रतिक्रिया खुद इस बात का प्रमाण है कि बजट में संतुलन और दूरदर्शिता की कमी है।उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का यह बजट चंद पूंजीपतियों और बड़े उद्योगपतियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जबकि देश की असली रीढ़ माने जाने वाले किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया। महंगाई, बेरोज़गारी और रोज़मर्रा की ज़रूरतों की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे आम लोगों को इस बजट से कोई राहत नहीं मिली।सांसद ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्य, जो देश को सबसे अधिक सांसद देता है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाता है, उसके साथ ऐसा सौतेला व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार को प्रदेश के किसानों, युवाओं और गरीबों के लिए विशेष पैकेज और योजनाओं की घोषणा करनी चाहिए।नीरज मौर्य ने कहा कि इस बजट से देश का गरीब, कमजोर और आम नागरिक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। सरकार को ज़मीनी हकीकत समझते हुए जनहितकारी नीतियां बनानी चाहिए, वरना जनता इसका जवाब आने वाले समय में देगी।