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काकोरी एक्शन शताब्दी वर्ष पर वृहस्पतिवार 19 दिसंबर को विविध आयोजन होंगे

  • अयोध्या रिपोर्ट गोपीनाथ रावत- काकोरी एक्शन शताब्दी वर्ष पर वृहस्पतिवार 19 दिसंबर को विविध आयोजन होंगे। काकोरी एक्शन के वें वर्ष पर सिविल लाइंस फैजाबाद स्थित प्रेस क्लब में शहादत दिवस पर देश की अनेकों जानीं मानी हस्तियां शामिल होंगी। इसमें नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रमुख मेधा पाटकर, वैज्ञानिक,शायर, लेखक तथा फिल्मकार गौहर रज़ा, क्रांतिकारी इतिहास लेखक सुभाष चन्द्र कुशवाहा, अमर शहीद अशफाक उल्ला खां के प्रपौत्र शादाब उल्ला खां प्रमुख हैं। अशफाक उल्ला खां मेमोरियल शहीद शोध संस्थान द्वारा आयोजित इस समारोह में संस्थान द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं के पुरस्कार, यतीमखाना, गुरुकुल तथा मूक-बधिर स्कूल के छात्रों को सहायता राशि एवं अंध विद्यालय के बच्चों को वस्त्र प्रदान किया जाएगा। काकोरी एक्शन 9 अगस्त 1925 को लखनऊ के निकट काकोरी रेलवे स्टेशन के पास दस क्रांतिकारियों द्वारा ट्रेन से सरकारी खाजाना लूटने की घटना के लिए जाना जाता है।यह सभी क्रांतिकारी गतिविधियों से देश को आजाद कराने वाले विचार के युवा थे। इस घटना का मुकदमा लखनऊ स्थित एक थिएटर में चलाया गया और चार क्रांतिकारियों को फांसी की सज़ा सुनाई गई। इसमें जेल से भाग जाने की शंका से सबसे कम उम्र के क्रांतिकारी राजेन्द्र लाहिड़ी को गोण्डा जेल में 17 दिसंबर को फांसी दे दी गई। जबकि शेष तीन लोगों को 19 दिसंबर 1927 को फैजाबाद में अशफाक उल्ला खां इलाहाबाद में ठाकुर रोशन सिंह तथा गोरखपुर में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को फांसी पर लटका दिया गया। क्रांतिकारियों के इस संगठन ने देश की आज़ादी के बाद देश और समाज की योजना बनाई तथा उसे जनता तक पहुंचाया। अशफाक उल्ला खां ने कहा “अगर हिंदुस्तान आजाद हो जाएं और बजाय गोरे आकाओं के हमारे वतनी भाई सल्तनत व हूकूमत की बागडोर अपने हाथ में लें लें और तफरीको – तमीज,गरीब व अमीर, जमींदार व कास्तकार में रहें तो ऐ खुदा मुझे एसी आजादी उस वक्त तक न देना जब तक मुल्क में मसावात क़ायम न हो जाए। मेरे इन ख्यालात से मुझको इस्तिराकी समझा जाए तो मुझे इसकी कोई फिकर नहीं ——- मैं हिंदुस्तान की एसी आजादी का ख्वाहिशमंद था जिसमें गरीब खुश और आराम से रहते और सब बराबर होते।खुदा मेरे बाद वह दिन जरूर लाए जबकि छतर मंजिल लखनऊ में अब्दुल्ला मिस्त्री और धनिया चमार, किसान भी मिस्टर खलीकुज्जमा और जगत नारायण मुल्ला व राजा साहब महमूदाबाद के सामने कुर्सी पर बैठे नजर आएं। संस्थान के प्रबंध निदेशक सूर्य कांत पाण्डेय ने कहा कि संस्थान क्रांतिकारी शहीदों का विचार नयी पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए संकल्पित होकर आयोजनों को पिछले 26 वर्षों से करता रहा है। और इसी उद्देश्य से प्रतियोगी परीक्षाओं का हर साल आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि स्वतंत्रता संग्राम में काकोरी एक्शन मील का पत्थर साबित हुआ।
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