रिपोर्ट: धर्मेंद्र कुमार, स्टेट हेड दिल्ली
नई दिल्ली
मध्य पूर्व इस समय आग की लपटों में घिरा हुआ है, जहां इज़राइल और ईरान के बीच छिड़ी सीधी सैन्य भिड़ंत ने न केवल क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाला है, बल्कि वैश्विक राजनीति, तेल व्यापार और नागरिक सुरक्षा की चुनौतियों को भी गहरा कर दिया है।
तेहरान और अश्दोद में तबाही का मंजर
ईरानी सेना ने शनिवार देर रात इज़राइली शहर अश्दोद पर मिसाइल दागे, जिसके जवाब में इज़राइली वायुसेना ने तेहरान समेत ईरान के छह एयरबेसों पर सटीक हवाई हमले किए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों में ईरानी सैन्य विमानों और रडार सिस्टम को गंभीर क्षति पहुँची है।
ऑपरेशन “सिंधु”: भारत का सबसे तेज़ निकासी मिशन
ईरान में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत सरकार ने ऑपरेशन “सिंधु” शुरू किया है। अब तक 2,100 से अधिक भारतीय नागरिक—जिनमें छात्र, तीर्थयात्री और श्रमिक शामिल हैं—को सुरक्षित दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद लाया जा चुका है।
विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया:
“हम 24×7 कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन के ज़रिए हर नागरिक से संपर्क बनाए हुए हैं। किसी भी स्थिति में हम अपने नागरिकों को नहीं छोड़ेंगे।”
‘14 घंटे तक लगातार बमबारी देखी’: लखनऊ लौटे तीर्थयात्रियों की आपबीती
माश्हद से लौटे लखनऊ निवासी मोहम्मद अब्बास ने बताया कि उन्होंने लगातार 14 घंटे तक बम गिरने की आवाज़ें सुनीं।
“हमारे होटल की खिड़कियाँ थर-थर कांप रहीं थीं। हमने जिंदगी में कभी इतना डर नहीं देखा।”
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ का असर: भारत में तेल महंगा हो सकता है*
ईरान-इज़राइल युद्ध के चलते स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ के बंद होने की आशंका ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है। भारत को अपने तेल आयात के 60% से अधिक हिस्से के लिए इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर रहना पड़ता है। कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती है, जिससे आम जनता पर महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा:
“प्रधानमंत्री मोदी युद्ध पर मौन क्यों हैं? भारत को एक सशक्त कूटनीतिक पहल करनी चाहिए ताकि यह संघर्ष आगे न बढ़े।”
इंटरनेट बंद और नागरिक संकट*
ईरान में युद्धग्रस्त इलाकों में इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी गई हैं। कई भारतीय छात्र और कामगार अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। इससे मानसिक तनाव और डर का माहौल बन गया है।
निष्कर्ष
ईरान-इज़राइल युद्ध अब सिर्फ एक सीमित सैन्य टकराव नहीं रहा। इसके दुष्परिणाम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, नागरिक सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर पड़ रहे हैं। भारत के लिए चुनौती दोहरी है—नागरिकों की जान बचाना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की वकालत करना।
रिपोर्टर: धर्मेंद्र कुमार