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आशाओं की हड़ताल का 43वां दिन पूरा, सरकार धैर्य की परीक्षा न ले : जॉली वैश्य

रिपोर्ट भूदेव प्रेमी

बदायूं।आशा कर्मियों की हड़ताल आज 43वें दिन भी जारी रही। मालवीय मैदान में चल रहे धरना-प्रदर्शन में आशा कर्मियों का भारी आक्रोश देखने को मिला, लेकिन साथ ही अपने हक की लड़ाई को लेकर उत्साह और एकजुटता भी स्पष्ट नजर आई।धरने को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष जॉली वैश्य ने कहा कि “मेहनतकशों के संघर्ष से ही इतिहास बनता है। सरकार आशा कर्मियों के धैर्य की परीक्षा न ले।” उन्होंने ऐलान किया कि आगामी 9 फरवरी का राजधानी कूच इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा, जब महिला कामगार सरकार के दमन के खिलाफ राजधानी को अपनी उपस्थिति से भर देंगी।उन्होंने बताया कि आज दिनांक 27 जनवरी 2026 को माननीय प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को खून से चिट्ठी सौंपे जाने की योजना थी, लेकिन मौसम खराब होने के कारण यह संभव नहीं हो सका। लैब टेक्नीशियन से वार्ता हो चुकी है और 28 जनवरी 2026 को खून से चिट्ठी लिखी जाएगी। यदि इसके बाद भी सरकार नहीं जागी, तो आशा कमेटी प्रतिदिन खून से मांग पत्र लिखेगी।जिला अध्यक्ष ने लंबित भुगतानों की मांग प्रमुखता से उठाई।वहीं जिला उपाध्यक्ष निर्दोष पटेल ने कहा कि सरकार 45वें व 46वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को तत्काल लागू करे।जिला महासचिव मनीष ने कहा कि सरकार द्वारा 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर सेवानिवृत्ति और ग्रेच्युटी भुगतान सुनिश्चित किया जाए।जिला मंत्री शशि सक्सेना ने मांग की कि न्यूनतम वेतन लागू होने तक आशा कर्मियों को ₹21,000 और आशा संगिनी को ₹28,000 मानदेय, यात्रा भत्ता सहित दिया जाए।धरने में मौजूद आशा कर्मियों व संगठन सदस्यों ने सरकार से मांग की कि ऑनलाइन कार्य के लिए सीयूजी सिम और टैबलेट की व्यवस्था की जाए।साथ ही वर्ष 2018 से वर्तमान तक दुर्घटना मुआवजा ₹2 लाख, स्वास्थ्य बीमा ₹10 लाख और जीवन बीमा ₹50 लाख सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई।आशा एवं आशा संगिनी को ईपीएफ व ईएसआई जैसी सरकारी सुविधाएं देने, गोल्डन आयुष्मान कार्ड व आभा परिचय पत्र सृजन में किए गए कार्य के बदले बिहार राज्य की तरह ₹15 प्रति दर से सितंबर 2025 तक का ₹2252 करोड़ का भुगतान एकमुश्त करने की मांग भी की गई।इसके अतिरिक्त वर्ष 2018 से 2025 तक विभिन्न दुर्घटनाओं में मृत आशा व आशा संगिनी के परिजनों को ₹2 लाख की अनुमन्य राशि व ₹10 लाख क्षतिपूर्ति के रूप में भुगतान करने की मांग रखी गई।धरने में रिंकी देवी, नीलम सक्सेना, नन्ही देवी, मीना देवी, शबनम, सरला, संतोष, प्रेमवती, चमेली, रोली, भावना सहित कई आशा कर्मी मौजूद रहीं।

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