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आंवला में बन रहा पशु पॉलीक्लीनिक

संवाददाता अर्जुन दिवाकर

बरेली जनपद के फरीदपुर स्थित पचौमी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय वृहद पशु आरोग्य मेले में मुख्य अतिथि के रूप में रहना हुआ।भारतीय संस्कृति पर्वों पर आधारित है और भारत में कृषि व ऋषि परंपरा का विशेष स्थान रहा है। कृषि हमें अन्न प्रदान कर जीवन देती है, वहीं ऋषि हमें जीवन जीने की सही शैली बताते हैं। आज सबको दूध, दही और घी की आवश्यकता है। परंतु कोई भी पशु पालना नहीं चाहता। यदि पशुपालन नहीं किया जाएगा तो ये वस्तुएं कहां से मिलेंगी।भारतीय सभ्यता में गोशाला, पाठशाला, व्यायाम शाला और यज्ञशाला का बहुत महत्व था, लेकिन विडंबना है कि गाय दूध देना बंद कर देती है तो लोग छोड़ देते हैं। भाजपा सरकार गोवंश की समस्या पर ध्यान दे रही है। मोदी जी और योगी जी है तो मुमकिन है। मनुष्यों के डॉक्टरों से पशुओं के चिकित्सकों को महान बताते हुए कहा मनुष्य रोग होने पर अपनी समस्या बता सकता है परंतु पशु चिकित्सक पशुओं के हाव-भाव से बीमारी का पता करके उनका इलाज करता है। इसलिए वह महान है।पशुपालन न केवल आय का अच्छा स्रोत है बल्कि इससे परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति भी होती है। महिलाओं से अपील की कि वे आय बढ़ाने के लिए गाय पालें। आंवला में दुग्ध डेयरी की स्थापना की गई है। जो दूध खरीदने के बाद प्रत्येक सप्ताह भुगतान करेगी। उक्त मेले में ग्राम प्रधान व कृत्रिम गर्भाधान करने वाले कार्यकताओं को उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया। बरेली

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